औरते बात छुपा क्यों नही पाती.
यह महाभारत काल की बात है. वासुदेव (भगवान श्री कृष्ण के पिता) की बहन का नाम पृथा था उन्हें राजा कुंती भोज ने गोद ले लिया और उनका नाम कुंती रख दिया. एक बार ऋषि दुर्वासा ने कुंती को एक मन्त्र की शिक्षा दी जिसकी शक्ति से वो किसी भी देवता को बुला सकती थी और उनसे सन्तान प्राप्ति कर सकती थी. उत्सुकतावश कुंती ने सूर्य देव को बुला लिया और मन्त्र के फलस्वरूप उनसे उसे पुत्र की प्राप्ति हुई. उस पुत्र को उन्होंने नदी में बहा दिया क्योंकि तब तक वो क्वांरी थी. वो बालक बहता हुआ एक व्यक्ति को मिला जो की हस्तिनापुर के राजा के यहाँ सेवक के रूप में कार्य करता था. बड़ा होकर जब उस बालक ने गुरु द्रोणाचार्य से शस्त्र चालन की शिक्षा लेनी चाही तो उन्होंने यह कहकर न करदी की वो बालक क्षत्रिय पुत्र नही था. तब उस बालक ने गुरु परशु राम से शस्त्रों की शिक्षा ली. वो बालक जिसका नाम कर्ण प्रसिद्ध हुआ आगे चलकर हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योदन का परम मित्र बन गया.
दूसरी तरफ कर्ण को पानी में बहाने के कुछ समय बाद कुंती की शादी उसवक्त के हस्तिनापुर के राजकुमार पांडु के साथ हो गयी. पांडु की एक और पत्नी भी थी. एक बार जब पांडु जंगल में शिकार खेलने गए तो गलती से उन्होंने एक ऋषि को जो की अपनी पत्नी के साथ प्रेमलीला में मग्न था उनको तीर मार दिया. गुस्से में ऋषि ने पांडु को श्राप दे दिया की वो जब भी अपनी पत्नियो के पास प्रेमपूर्वक जायेंगे तब ही उनकी मृत्यु हो जाएगी. तब कुंती ने ऋषि दुर्वासा द्वारा बताये मन्त्र की सहायता से धर्मदेव से युधिष्ठर, वायु देव से भीम और इंद्र देव से अर्जुन को प्राप्त किया. पांडु की दूसरी पत्नी ने उसी मन्त्र की सहायता से अश्वनी देव से नकुल और सहदेव को प्राप्त किया. पांडु के ये पांचो पुत्र ही पांडव कहलाये. और एक बार जब प्रेमवश पांडु ने अपनी पत्नी के पास जाने की कोशिश की तो उनकी मृत्यु हो गयी.
आगे चलकर जब महाभारत का युद्ध हुआ तो कर्ण कौरवो की तरफ से लड़ा. जब कर्ण और अर्जुन के बीच में निर्णणायक युद्ध होना था तब उस युद्ध से पहले कुंती ने अकेले में कर्ण को यह भेद बता दिया. इसके बावजूद वो पांड्वो की तरफ न जाकर कौरवो की तरफ से ही लड़ता रहा मगर वो मोह वश मौका मिलने पर भी अर्जुन को नही मार सका और अंत में अर्जुन ने उसे मार दिया. बाद में जब कर्ण के अंतिम संस्कार के लिए विवाद हुआ तो कुंती ने यह भेद पांड्वो के सामने खोल दिया. यह जानकर अर्जुन को कर्ण को मारने का बहुत पश्चाताप हुआ और उसने गुस्से में कुंती को श्राप दिया की अब किसी औरत के पेट में कभी कोई बात नही पचेगी. और उस दिन के बाद से औरतो के पेट में कोई बात नही पचती.
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